Saturday, October 27, 2018

What is Mutual Fund in Hindi | Types of Mutual Funds

दोस्तों आज हम इस पोस्ट में What is Mutual Fund और Types of Mutual Funds के बारे में जानेंगे। दोस्तों Mutual Fund में निवेशक याने गुंतवणूकदार एक बड़ी संख्या में राशि जमा करता है और यह एक इन्वेस्टमेंट का ही प्रकार है। दोस्तों म्यूचुअल फंड में आम आदमी से लेकर बड़े आदमी तक कोई भी पैसे लगा सकता है।

तो दोस्तों अगर आप Mutual Fund में investment करना चाहते है तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है - जैसे की What is Mutual Fund ?  म्यूचुअल फंड क्या है ? म्यूचुअल फंड में पैसा कैसे इन्वेस्ट करे ? types of Mutual Fund और इसमे invest करने से क्या फायदा होता है इत्यादि। तो आज हम इस पोस्ट में इन सब के बारे में जानेंगे।


Open Ended Funds, Equity Fund, Debt Fund, Balanced Fund, Liquid Fund, Close Ended Funds, Fixed Maturity Plan Fund, Capital Protection Fund, Mutual Fund


What is Mutual Fund in Hindi ? म्यूचुअल फंड क्या है ? Mutual Funds investment 


Mutual Fund में यह एक तरह की investment ही है जहा निवेशक / गुंतवणूकदार एक बड़ी संख्या में अपना पैसा जमा करते है। म्यूचुअल फंड में आम आदमी से लेकर बड़े आदमी तक हर कोई पैसे लगा सकता है।

लोगों को यह लगता है कि म्यूचुअल फंड में बड़ी राशि की गुंतवणूक करने से बहुत फायदा होगा। लेकिन आम आदमी जैसे लोग बड़ी amount की गुंतवणूक तो नही कर सकते, पर ऐसा जरूरी नही की आप बड़ी अमाउंट से ही इन्वेस्ट करे, आप छोटी अमाउंट से भी invest कर सकते है।

बल्कि आप हर महीने 500 /- की छोटी सी अमाउंट से भी म्यूचुअल फंड में निवेश करना शुरू कर सकते हैं और जैसे आपकी इनकम बढ़ती जायेगी उसके साथ-साथ आप अपने निवेश की अमाउंट भी बढ़ा सकते हैं।

Mutual Funds investment करने के लिए आपको KYC पूरी करनी होती है। इसके लिए आपको E-KYC फॉर्म भरना होता है और फॉर्म के साथ आपको कुछ address प्रूफ भी देना पड़ता है जैसे की पैन कार्ड, आधार कार्ड की कॉपी, पासपोर्ट, bank statement या इलेक्ट्रिसिटी बिल की कॉपी देनी पड़ती है और वह फॉर्म आपको रजिस्टर्ड ऑफ़िस या म्यूचुअल फंड ऑफ़िस में जमा करना होता है।


How to choose a mutual fund scheme ? म्यूचुअल फंड स्कीम को कैसे चुने ?

Mutual Fund में हर कोई पैसा लगाना चाहता है, अगर कोई व्यक्ति पहली बार म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले है तो उसे अपनी आवश्यकता के अनुसार, जोखिम उठाने की क्षमता और गुंतवणूक के कालावधि के हिसाब से ऐसी स्कीम को चुनना चाहिए।

जिसे म्यूचुअल फंड के बारेमे ज्यादा कुछ जानकारी नही है और वे म्यूचुअल फंड में पैसा invest करना चाहते है ऐसे निवेशक को किसी फ़ाइनेंशियल प्लानर या Distributor की मदद से इस स्कीम को चुनना चाहिए।


Types of Mutual Funds in Hindi :- 

Mutual Fund के मुख्य रूप से दो प्रकार होते है एक Open Ended Funds और दूसरा Close Ended Funds । तो दोस्तों हम इन दो प्रकारों के बारे में विस्तारित रूप से  जानेंगे।

1) Open-Ended Funds ( ओपन एंडेड स्कीम ) :- 


ओपन एंडेड स्कीम इस प्रकार में, अवधि के दौरान किसी भी निवेशक यूनिट्स को खरीद सकता है या बेच सकता है।

Open Ended Funds कोई निर्धारित परिपक्वता नही रहती। इस प्रकार में कोई निवेशक जब चाहे तब इसमे पैसे लगा सकते है।

इस स्कीम में पैसे लगाने के लिए कोई लिमिट नही होती परंतु इसमे इन्वेस्ट करने के लिए उन्हें कुछ शुल्क देना पड़ता है। 

ओपन एंडेड स्कीम में चार प्रकारों का समावेश होता है :- 

A) Equity Fund  ( इक्विटी फंड )
B) Debt Fund ( डेब्ट फंड )
C) Balanced Fund ( बैलेंस्ड फंड )
D) Liquid Fund ( लिक्विड फंड )

इन चारों प्रकारों का विश्लेषण नीचे दिया गया है।

A) Equity Fund ( इक्विटी फंड ) :- 

इक्विटी फंड में खासकर शेयर्स या कोई कंपनी के स्टॉक्स में इन्वेस्ट करते है। Equity Fund के फंड मेनेजर का मुख्य उद्देश यही रहता है की, वो निवेशक के Investment को ऐसी कंपनी के शेयर में इन्वेस्ट करे ताकि वह निवेशक के इन्वेस्टमेंट को कम समय में ज्यादा से ज्यादा बढायें, इसलिए यह फंड Growth Fund याने वृद्धि फंड के नाम से भी जाना जाता है।

छोटे समय के लिए इस फंड में निवेश की जोखिम तो भरी होती है, लेकिन लम्बे समय में आप इस प्रकार के फंड्स में अच्छे रिटर्न की भी उम्मीद बहुत होती हैं। 

Equity Fund में सारे काम फंड मेनेजर की मदद से ही होते है इसलिए शेयरों में इन्वेस्ट करने के लिए आपको ज्यादा कुछ सोचने की या फिर कोई चिंता करने की कुछ जरूरत नही पडती, यह एक सबसे अच्छा फायदा इस फंड से होता है।

इक्विटी फंड में इन्वेस्ट करने के लिए आप किसी ब्रोकर या किसी एजेंट की मदद ले सकते है या फिर आप ब्रोकर के बिना खुद ही online निवेश शुरू कर सकते, अगर आप ब्रोकर या एजेंट की मदद लेते है तो उन्हें आपको कुछ fees देनी पडती है।


B) Debt Fund ( डेब्ट फंड ) :- 

Debt Fund में ज्यादातर निवेश कंपनी डिबेंचर, ट्रेजरी बिल, सरकारी बॉण्ड, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स, कॉरपोरेट ऋण स्कीम इन सब में किया जाता है।

जो निवेशक किसी भी प्रकार की रिस्क नही लेना चाहता है ऐसे गुंतवणूकदारों के लिए Debt Fund का उपयोग होता है। जब आप डेब्ट फंड खरीदते है तो आप जारी करने वाले जो संस्थाए होती है उन्हें लोन देते हैं।

इस प्रकार के फंड आपको return की कोई गारंटी नही रहती लेकिन इसमे आपको अच्छा सा मुनाफ़ा जरुर मिलता है।

C) Balanced Fund ( बैलेंस्ड फंड ) :- 

Balanced Fund को हायब्रिड फंड के नाम से भी जानते है। कुछ लोग सिर्फ डेब्ट फंड में ही पैसा लगाते है तो कुछ लोग केवल इक्विटी फंड में ही निवेश करते है, 

लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है, जो दोनों में याने की डेब्ट फंड और इक्विटी फंड में invest करना चाहते है ऐसे फंड को Balanced Fund कहते है।

आज बहुत से लोग बैलेंस्ड फंड में ही पैसा इन्वेस्ट करते है क्योंकि इससे एक बहुत अच्छा फायदा होता है की, जब इक्विटी फंड returns नही दे पाता तो ऐसे वक्त में आपको डेब्ट फंड की मदद होती है।

D) Liquid Fund ( लिक्विड फंड ) :- 

जो निवेशक कम समय के लिए सुरक्षित रूप से इन्वेस्ट करना चाहते है ऐसे निवेशकों के लिए लिक्विड फंड यह एक सबसे अच्छा और फ़ायदेमंद फंड है और निवेशक इस फंड का उपयोग 1 से 3 महीने के लिए कर सकते है।

इन्वेस्टमेंट मेनेजर 91 दिन या उससे भी कम अवधि के लिए ट्रेजरी बिल्स, सर्टिफ़िकेट ऑफ डिपाज़िट, गवर्मेंट सिक्‍योरिटीज में निवेश करते है। लिक्विड फंड को ही सबसे कम जोखिम वाला फंड माना जाता है। 

2) Close Ended Funds ( क्लोज्ड एंडेड स्कीम ) :- 


Close Ended Funds में परिपक्वता का समय पहले से ही निर्धारित किया जाता है। इसमें आप तब भी इन्वेस्ट कर सकते है जब NFO ( New Fund Offer ) जारी किया जाता है।

close Ended Funds प्रकार का फंड यूनिट एक निश्चित अवधि के लिए होता है इसमे निश्चित या निर्धारित समय के लिए पैसा लगाया जाता है। इस प्रकार के फंड का समय पूरा होने के बाद ही आप इस फंड पैसे निकाल सकते है।

अगर आप फंड अवधि पूरा होने के पहले पैसे निकालना चाहते है तो शेयर की तरह ही इसके यूनिट को भी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड करवाकर उसकी मदद से कभी भी खरीद सकते है या बेच सकते है।

Close Ended Funds / क्लोज्ड एंडेड स्कीम में दो प्रकार के फंड आते है।

A) फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान ( निश्चित परिपक्वता फंड )
B) कैपिटल प्रोटेक्शन फण्ड ( कैपिटल प्रोटेक्शन फंड )

इन दोनों प्रकारों की जानकारी निचे दी गयी है

A) Fixed Maturity Plan ( निश्चित परिपक्वता फंड ) What is fmp :- 

FMP funds में पैसा invest करने से पहले आपको एक बात ध्यान रखनी चाहिए की आपके पास दूसरा कोई फंड हो या इसके अलावा अलग सी कोई इन्वेस्टमेंट होनी चाहिए क्योंकि अगर आपको अचानक से किसी प्रकार की प्रॉब्लम आती है तो आपके पास दूसरा कोई ऑप्शन होना बहुत जरूरी है क्योंकि निश्चित परिपक्वता फंड में पहले से ही परिपक्वता या Maturity का समय निर्धारित किया जाता है।

इसीलिए अगर आप FMP में पैसा इन्वेस्ट करते है तो आप समय पूरा होने के पहले इस फंड से पैसे नही निकाल सकते। अगर ऐसा हुआ तो आपको कुछ चार्ज देना पड सकता है। इस प्रकार के फंड में charges भी बहुत कम रहते है, क्योंकि पहले से ही fund manager को निर्धारित उपकरणों में इन्वेस्ट करना होता है।

B) Capital Protection Fund ( कैपिटल प्रोटेक्शन फण्ड ) :- 

Capital Protection Fund का उपयोग निवेश की गई राशि को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है इसलिए निवेशक अपनी राशि या पैसों को सेफ रखने के लिए इस प्रकार के फंड में इन्वेस्ट करते है।

Capital Protection Fund प्रकार के फंड में केवल एक निर्धारित समय के कालावधि तक ही इन्वेस्ट किया जाता है। इस फंड में ज्यादातर इन्वेस्ट फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में किया जाता है और कुछ हिस्सा इक्विटी में भी इन्वेस्ट करते है। इसमे इन्वेस्ट किया गया पैसा सुरक्षित रखकर अच्छा लाभ होता है।

तो दोस्तों आशा करता हूँ की Mutual Fund के बारेमे आपको काफी कुछ जानकारी मिली होंगी की, म्यूचुअल फंड क्या है, म्यूचुअल फंड के कितने प्रकार है, म्यूचुअल फंड स्कीम को कैसे चुनना चाहिए और उम्मीद है की आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी होंगी। तो दोस्तों आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो हमे कमेंट्स करके बताये और अपने दोस्तों में शेअर करें।

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